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Showing posts from July, 2023

उसकी कोई गलती नहीं थी!

अरे नहीं, इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी! वो ऐसी परिस्थितियों में ही पला था जहाँ छीन कर, चुराकर और धोखा देकर ही कुछ पाया जा सकता था और जहाँ चालबाजी को सबसे कीमती आभूषण के रूप में धारण किया जाता था! उसने अपने माता, पिता, भाई और दोस्तों को ऐसे ही करते देखा था! उसने शारीरिक शक्ति और सौंदर्य के प्रभाव से सम्मान व् सुख की प्राप्ति के साधन सृजित करना सीखा था अपने दूसरे दोस्तों की तरह! वह उन सभी शास्त्रों और धर्म के मार्ग से पृथक था क्योकि ऐसा कोई भी नहीं था जो उसे यह बताता की वो जो कर रहा है वो भविष्य में उसके लिए क्या प्रतिफल लेकर आने वाला है!

Pistachios

These pistachios did not open their mouth even my intentional efforts of provoking and hammering. If any of them could inculcate such courage, would be consumed and not get honor to be part of this picture. I could see few of them are so scared, few others are carrying this like upbringing, few are well taught by lession of life, few have developed a robust inner conflict management mechanism to tolerate hammering with patience and few are blessed not to get distracted with the situation. The only thing I may not understand, what is the point of their being here? One day I will really test them very hard and consume most of them and at the end when I surrender, will leave who all or one will qualify my test and keep mouth shut for entire life. I still know all of them who have been consumed or tested with time and situations, very precious to me containing so much nutrition beneath their shells and I value it too. Even I am impressed to see such level of tolerance in these tested and l...

उत्तर

प्रकृति के गर्भ में उन सभी प्रश्नों के उत्तर छिपे है जिन्हें आप जानना चाहते है! यह विधान उचित ही है कि आप अनेक उत्तरों से अछूते बने रहते है! प्रयास से हम उन सभी संभावित उत्तरों की प्राप्ति कर सकते है! किन्तु यह भी सत्य है की निर्विकार होकर ही दुर्लभ ज्ञान का रसास्वादन करें! किसी भी प्रकार की अयोग्यता आपके जीवन की दशा एवं दिशा बदल सकती है!

वो धूल बहुत प्यासी थी!

वो धूल बहुत प्यासी थी! वो वर्षो से चाय-चाय चिल्ला रही थी!! आखिर उसने चाय छीन ही ली!!

भ्रम

वह घनघोर जंगल की अँधेरी गुफा में बैठा था जहाँ तक सूर्य का प्रकाश कभी पंहुचा ही नहीं! एक दिन अचानक गुफा के द्वार पर दीपक प्रकट हुआ! जिसने कभी प्रकाश ही न देखा हो उसके लिए यह ईश्वरीय अनुभूति से कम न रहा होगा! परन्तु वो भाग कर पुनः छिप गया! वर्षो से जिस अंधकार में वो रहा था उसके मोहपाश से वो कभी मुक्त नहीं होना चाहता था और उसे दीपक के होने की सत्यता में भ्रम था!

जल के रूप और रंग का नियमन !

जल किस रंग का होता है, क्या उसके रूप और रंग का नियमन करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उलंघन होगा! प्रकृति की पहेली को समझना शायद सबसे कठिन कार्य है! सभी निर्णय क्या हमेशा न्याय, धर्म और सत्य से आभूषित रह पाते है! शास्त्रों में तो यह लिखा है की इस मृत्युलोक में जीवन की रक्षा सबसे बड़ा धर्म, सत्य और न्याय है!  

ईश्वर सदबुद्धि दें।

जानवर का जीवन आसान होता है और मनुष्य जानवर की तरह नहीं जी सकता। पर बुद्धि और विवेक से जीने के लिए जिस संकल्प शक्ति की आवश्यकता होती है उसे तो लोगों ने नशे, उदारवादी बनने, और जानवर की तरह जीकर उसे ही इंसान का जीवन मानने और मनवाने में नष्ट कर डाला है। अगली पीढ़ी को हम अपने से भी अधिक नशा, पशुवत् उन्मुक्त जीवन, भोग-विलासिता और मानसिक रूप से कमजोर बनाने वाले सभी उपक्रम परोसने के लिए सभी माध्यमों से धन संचय कर रहें हैं। यह कमजोर लोगों का और व्यक्तित्वहीन समाज है जो अपने पतन की ओर अग्रसर है। ईश्वर सदबुद्धि दें।  

आदर्श !

ध्यान से देंखे तो इस सृष्टि में ऐसा कुछ भी नहीं है जो कुछ सिद्धांतो, आदर्शो और नियमो से जुड़ा हुआ न हो! अगर कभी कुछ ऐसा था जो सिद्धांतरहित, स्वछंद और अनियमित था तो शीघ्र ही नष्ट हो गया! इतिहास के पन्ने इन उदाहरणों से भरे पड़े है! कभी सोचा है अगर यह धरती अपनी धुरी पर अलग अलग गति से घुमने लगे या सूरज की परिक्रमा मनमौजी ढंग से करे तो क्या होगा! अगर आपका ह्रदय स्वछंद गति से चले या रुक जाये या स्वास बिना किसी नियम के चले तो क्या जीवन संभव होगा! स्वछंद चिंतन से पूर्व उन नियमो, आदर्शों और सिद्धांतो को समझ लेना अच्छा है जिन्हें दरकिनार करने जा रहें हैं! बाद में ईश्वर पूछने पर भी नहीं बताता की जिस विपरीत स्थिति में आप फंसे है वो किस नियम के उलंघन का दंड है!

Happy Navratri💐💐💐

The different energies responsible for functioning your body and connection with sole are going to rejuvenate, format, reboot and processing to gain strength based on the your karma in last year and the karma you carrying from past lives. Keep your thoughts pure and toward the almighty these days. So that the energetic algorithms becomes pure and further inculcate positive thoughts and emotions. As the energy running the universe accepts and consider everything which exist equally, you are only who is given control to decide how much positivity or negativity you wanted to charge within. Happy Navratri💐💐💐

सहज हो जाना !

सहज हो जाना शायद वह अंतिम पडाव है जहा वैदिक और पौराणिक दर्शन की कूटबद्ध कथाये हमे ले जाने का प्रयास करती प्रतीत होती हैं ! अब तक मैने जिन शास्त्रो को समझा हैं या गुरू मंडल से जो आशिर्वाद मिला हैं उसके आधार पर यह समझ पाना आसान है कि अच्छा - बुरा, सत्य - असत्य, सही - गलत आदि द्वैत भाव ही निषकर्ष प्राप्त करने मे सबसे बड़े अवरोधक हैं ! यह तर्क ऊचित भी है क्योकी अनेक उदाहरण है जो यह सिद्ध करते है कि इस सृष्टि मे सब ईश्वर द्वारा ही रचित है ! यह भी कि भौतिक शास्त्र भी इस तर्क का समर्थन करता है कि प्रत्येक क्रिया कि बिपरीत क्रिया होती है ! किंचित यही क्रिया - प्रतिक्रिया का साम्य ही इस सृष्टि का बीज है ! हां, पर यह सुनिश्चित है कि अच्चाई, सत्य और सही ही अपनाने योग्य है ! कारण यह है कि इसी मे नियम, क्रम, संयम, सद आचरण, ममता, दया आदि मानवीय गुण विद्यमान है ! यही वह तत्व है जो साम्य को मानता है और उसमे कोई हस्तक्षेप नही करता ! इसी प्रकार यदि बुरा, असत्य और गलत के क्रम मे देखें तो अनेक उदाहरण मिल जायेगे जब इस तत्व ने अपनी सीमाओ का आतिक्रमण किया है ! अनियमित, अव्यवस्थित, दुराचरण आदि अमानवीय तत्...

इंसान व शैतान

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  अगर आप इंसान है तो आपको क्रूरता नहीं करनी चाहिए । और शैतान है तो दया नहीं करनी चाहिए । स्वयं को शैतान मान लेना मुश्किल है परंतु हर किसी को अपने बारे में इतना तो जानना ही चाहिए ।...

#हिंदी

पहले लोगों का Status हुआ करता था। अब लोग status लगाते हैं । और वो भी अंग्रेज़ी में । चाहे अंग्रेज़ी में दो शब्द एक Comfortable और एक English ही आता हो तो बोलेंगे english में comfortable है । ये समझ में नहीं आता की जब हिंदी भाषी देश में जन्म लिया तो हिंदी में सहज क्यू नहीं महसूस करते हैं । शायद हिंदी में उदंडता की अभिब्यक्ति सहज नहीं है। कुछ लोग तो नीचता की निष्कृष्टता तक गिर कर अपनी मातृभाषा का अपमान करने में लग गए हैं । बताते हैं कि हिंदी में बोलना बहुत कठिन है । और फिर क्लिष्ट शब्दों में एक अंग्रेज़ी शब्द की पूरे वाक्य में हिंदी अर्थ बताकर मज़ाक़ बनाते है । ऐसे लोग ग़ुलाम मानसिकता से आज़ादी के इतने दशकों बाद भी उबर नहीं पाए । कुछ लोग तो अपने परिवार में भी अंग्रेज़ी में ही बात करते है जैसे किसी अंग्रेज का परिवार हों। कुछ लोग चाय बेचने वाले से अंग्रेज़ी में चाय माँगते है या यू कहें तभी अंग्रेज़ी बोलते है जब उन्हें पता हो की सामने वाला ज़्यादा समझ नहीं पाएगा । कुछ को ग़ुस्सा भी अंग्रेज़ी में ही आता है । अंग्रेजों ने भारत पर जब शासन किया तो हिंदी को तुच्छ भाषा बताया और मैकाले ने शिक्षा ...

यह सृष्टि ही माँ है ।

यह सृष्टि ही माँ है । जो भी आप देख, सुन, समझ या महसूस कर सकते है वो भी माँ ही है । वो माँ है जो कभी माता-पिता बनकर आपका पालन करती है, कभी भाई-बहन बनकर आपके साथ खेलती है । और कभी मित्र बनकर आपके सारे कष्ट हर लेती है । कभी फल और सब्ज़ियों का रूप धारण कर आपकी भूख मिटाती है तो कभी जल बनकर आपकी प्यास का शमन करती है । माँ ही आदि और अंत है। जो स्वयं को माँ से अलग समझता है वो गलत समझता है बल्कि वो स्वयं भी माँ के व्यक्तित्व का विस्तार है । ऐसी माँ को शत शत प्रणाम ।

बात जरुर करे !

अंतररास्ट्रीय समस्याओ से लेकर आम जीवन की छोटी छोटी बाते, बात-चीत सभी समस्याओ का एकमात्र समाधान है! गौरतलब है की यह ऐसे शब्दों में हो की कहने वाला जो समझ कर कहता हो सुनने वाला भी उसे वैसे ही समझ पाए! सुनने में यह ध्यान रखना होगा की कोई पूर्व की बात आपको सही अर्थ समझने से न रोक रही हो! यथा संभव उदार होकर किसी बात को सुने! स्वयं को विद्वान समझने से अच्छा है की जो बाते आपकी समझ से परे है उसे किसी अनुभवी व्यक्ति से पूछ ले! कहने वाले की बात को सुनने वाला अगर अपने किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए कोई दूसरा अर्थ लेता है तो यह समाधान से दूर लेकर जायेगा! बाते अच्छी या बुरी नहीं होती बल्कि हम यह देख पाए की ये किस तरह हमें अपनी तात्कालिक समस्याओ से मुक्ति देता है! यह बेहद जरुरी है की भले ही कुटनीतिक हो पर बात जरुर करे!

मिसाइल का सृजनात्मक पहलू ।

मिसाइल हमेशा विनाश के लिए प्रयोग की जाए, यह ज़रूरी नहीं । भले ही इसको बनाने वालों ने इसके सृजनात्मक पहलू पर विचार नहीं किया, पर ऐसा सम्भव है । देश में बहुत से लोग है जिनमे कुछ स्विटचरलैंड जाने को आतुर है, कुछ को यूरोप से अगाध प्रेम है । कुछ पाकिस्तान को अपने देश से बेहतर स्थान मानते है । कुछ के लिए अमेरिका जाना सशरीर स्वर्ग जाने जैसा है । अपने इस प्रेम में वे ना चाहते हुए भी समय समय पर अपने देश का अपमान कर बैठते है और अपने लिए समस्यायें उत्पन्न कर लेते है । अरे देश प्रेमियों, इसमें उनका कोई दोष नहीं । वे सर्वथा क्षमा योग्य है । जिस प्रकार जब मानव का ध्यान ईश्वर में लीन हो जाता है तो वह सदैव ईश्वर का नाम स्मरण करता है / जपता रहता है, ठीक उसी प्रकार इनके मन में सदैव अमेरिका/यूरोप/पाकिस्तान/स्विटचरलैंड का नाम की माला चलती रहती है । क्यू ना एक ऐसी मिसाइल बनाई जाए जिसमें अलग अलग देशों के नाम का सेंसर लगा हो । चलने के बाद जैसे बस का कंडक्टर स्थान का नाम लेकर लोगों को बुलाता है, ठीक वैसे ही ये मिसाइल लोगों के मन में चल रहे जप को पढ़ कर उन्हें उठा ले और उन्हें सकुशल उनके स्वर्ग में ले जाकर ...

हे नीच मनुष्यों ।

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  हे नीच मनुष्यों, तुमने खा लिया है या क़ब्ज़ा कर लिया है उन बंदरों का खाना जिन्होंने आज मेरे कूड़ेदान से जूठे फल के छिलके खाए है । बहुत पाप लगेगा, खाना तो नहीं ही मिलेगा ऐसे कर्म पर । और पानी के स्रोतों पर जो तुमने क़ब्ज़ा किया है और पशु - पंछी पानी के बिना तड़प के मर रहें है । इसी लिए पानी भी नहीं मिलेगा । फिर भी कई नीच जब परेशानी में फँसते है तो पूछते है की उनके साथ ऐसा क्यू हो रहा है । अभी क्या हो रहा है जो आगे होगा । प्रेत बनोगे सब ।

अनंत पाताल

पाताल के नीचे अनंत पाताल है…सुन लो गिरने वालों, ईश्वर के बनाए इस संसार में तुम्हारे लिए कहीं कोई धरती नहीं ।

मच्छर

मृत्यु उपरांत उसे पछतावा हुआ । अरे………खून तो पी ही नहीं पाया । फिर वह मच्छर बना ।

ऐ मदर्स डे मनाने वालों ।

ऐ मदर्स डे मनाने वालों ।   कम से कम आज तो अपनी माँ को थोड़ा समय दे दो । कहीं घुमाने ही ले जाओ । कुछ पसंद का खिला दो: मँगवा लो या बना दो । कुछ उपहार दे दो । बस ध्यान रखना की जिस तरह तुम्हें पाल-पोष कर बड़ा किया गया और जितना बलिदान माँ ने आपके लिए किया उसके अनुपात में आप जो कर रहे है उसमें कुछ कमी ना रह जाय । ये सब करते हुए अगर आपको लगे की खर्चा ज़्यादा हो गया है तो इससे अपनी नीचता का अनुमान लगाना । ऐ मदर्स डे मनाने वालों । दूर बैठे हो तो हवाई जहाज़ में बैठ कर पहुँच जाओ, अरे वही हवाई जहाज़ जिसमें बैठ कर दूर तक घूमने जाते हो पल भर में और फिर लौट आते हो समय से। इस प्रकार नौकरी या व्यापार जो तुमने माँ से बहुत दूर कर लिया है, वहाँ बिलंब नही होगा । कम से कम आज एक दिन माँ को लोरी सुना के सुला देना, अरे वही लोरी जो माँ तुम्हें सुनाकर सुलाती थी रोज़ । पता नहीं माँ अगले मदर्स दे पर रहे ना रहे । ऐ मदर्स डे मनाने वालों, आज ऐसा ज़रूर करना । माँ बहुत खुश होगी । फिर पूछ लेना खुश हुई की नहीं ।