यह सृष्टि ही माँ है ।
यह सृष्टि ही माँ है । जो भी आप देख, सुन, समझ या महसूस कर सकते है वो भी माँ ही है । वो माँ है जो कभी माता-पिता बनकर आपका पालन करती है, कभी भाई-बहन बनकर आपके साथ खेलती है । और कभी मित्र बनकर आपके सारे कष्ट हर लेती है । कभी फल और सब्ज़ियों का रूप धारण कर आपकी भूख मिटाती है तो कभी जल बनकर आपकी प्यास का शमन करती है । माँ ही आदि और अंत है। जो स्वयं को माँ से अलग समझता है वो गलत समझता है बल्कि वो स्वयं भी माँ के व्यक्तित्व का विस्तार है । ऐसी माँ को शत शत प्रणाम ।
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