आदर्श !

ध्यान से देंखे तो इस सृष्टि में ऐसा कुछ भी नहीं है जो कुछ सिद्धांतो, आदर्शो और नियमो से जुड़ा हुआ न हो! अगर कभी कुछ ऐसा था जो सिद्धांतरहित, स्वछंद और अनियमित था तो शीघ्र ही नष्ट हो गया! इतिहास के पन्ने इन उदाहरणों से भरे पड़े है! कभी सोचा है अगर यह धरती अपनी धुरी पर अलग अलग गति से घुमने लगे या सूरज की परिक्रमा मनमौजी ढंग से करे तो क्या होगा! अगर आपका ह्रदय स्वछंद गति से चले या रुक जाये या स्वास बिना किसी नियम के चले तो क्या जीवन संभव होगा! स्वछंद चिंतन से पूर्व उन नियमो, आदर्शों और सिद्धांतो को समझ लेना अच्छा है जिन्हें दरकिनार करने जा रहें हैं! बाद में ईश्वर पूछने पर भी नहीं बताता की जिस विपरीत स्थिति में आप फंसे है वो किस नियम के उलंघन का दंड है!

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