मिसाइल का सृजनात्मक पहलू ।

मिसाइल हमेशा विनाश के लिए प्रयोग की जाए, यह ज़रूरी नहीं । भले ही इसको बनाने वालों ने इसके सृजनात्मक पहलू पर विचार नहीं किया, पर ऐसा सम्भव है ।

देश में बहुत से लोग है जिनमे कुछ स्विटचरलैंड जाने को आतुर है, कुछ को यूरोप से अगाध प्रेम है । कुछ पाकिस्तान को अपने देश से बेहतर स्थान मानते है । कुछ के लिए अमेरिका जाना सशरीर स्वर्ग जाने जैसा है । अपने इस प्रेम में वे ना चाहते हुए भी समय समय पर अपने देश का अपमान कर बैठते है और अपने लिए समस्यायें उत्पन्न कर लेते है ।
अरे देश प्रेमियों, इसमें उनका कोई दोष नहीं । वे सर्वथा क्षमा योग्य है । जिस प्रकार जब मानव का ध्यान ईश्वर में लीन हो जाता है तो वह सदैव ईश्वर का नाम स्मरण करता है / जपता रहता है, ठीक उसी प्रकार इनके मन में सदैव अमेरिका/यूरोप/पाकिस्तान/स्विटचरलैंड का नाम की माला चलती रहती है ।
क्यू ना एक ऐसी मिसाइल बनाई जाए जिसमें अलग अलग देशों के नाम का सेंसर लगा हो । चलने के बाद जैसे बस का कंडक्टर स्थान का नाम लेकर लोगों को बुलाता है, ठीक वैसे ही ये मिसाइल लोगों के मन में चल रहे जप को पढ़ कर उन्हें उठा ले और उन्हें सकुशल उनके स्वर्ग में ले जाकर छोड़ दे ।
बहुत पुण्य मिलेगा । भेजने वाले को असली स्वर्ग की प्राप्ति होगी ।

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